साहित्य समाज का दर्पण होता है।
साहित्य समाज का दर्पण होता है, लेकिन आज के चलचित्र जगत मे ऐसे कार्यक्रम दिखाए जा रहे है जिनसे कोई शिक्षा तो नहीं मिल रही बल्कि हमारा और समाज का नैतिक पतन हो रहा है। दोस्तों मै यह नहीं बोल रही की चलचित्र नहीं होना चाहिए पर यह एक ऐसा अविष्कार है जो हर किसी की ज़िंदगी को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित् करता है।
दोस्तों हम रोज़ टी वी देखते है कुछ कार्यक्रम तो बहुत ही ज्ञानवर्धक और उपदेशो से भरे होते है लेकिन ज्यादातर कार्यक्रम ऐसे होते है जिन से सिर्फ अनैतिकता सिखते है। अक्सर यह कार्यक्रम बनाने वाले ज्यादा से ज्यादा पैसे कमा ने के लिए इतना मसाला एवं असामाजिक तत्व डाल देते है की, इसका समाज मे क्या असर होगा वह यह बात नज़रअंदाज़ कर देते है।
अगर हम आज टी वी पे देखे तो, लगभग ज्यादातर कार्यक्रमों मे यही दिखाया जाता की किस तरह परिवार के लोग आपस मे ही साजिश, नफरत और राजनीती करते है। माँ बाप से बच्चो को अलग होते हुए तथा हमारी संस्कृति झोड़, पश्चात संस्कृति का प्रभाव ज्यादा दिखाया जा रहा है।
इस मनोरंजन के साधन से हमारी युवा पीढ़ी पे बहुत बुरा असर पढ़ रहा है, हम इन कार्यक्रमों का अनुकरण करके कई बार घर मे हमारा व्यव्हार अच्छा नहीं होता है। बच्चो मे तो इसका ज्यादा ही असर होता है वो कार्यक्रम मे जो देखते है उस की नक़ल करते है मुझे याद है एक हास्य कार्यक्रम जो आजकल टी वी मे बहुत ही प्रसिद्ध है जिस मे एक रैपर/संगीतकार बतौर मेहमान आये थे इसी कार्यक्रम के दौरान संचालक, कार्यक्रम देखने आयी जनता मे से एक छोटे से बच्चे को मंच पे बुलाता है और उसे रैपर/संगीतकार का गाना गाने को बोलता है तो वह बच्चा यह गाना गता है 'चार बोतले वोडका ... काम मेरा रोज़ का '! आश्चर्य की बात है की जिस उमर मे बच्चो को ज्ञान, संस्कार एवं विज्ञान जैसी बाते सिखानी चाइये वहां बच्चे तो 'चार बोतल वोडका' जैसे गाने गुन गुना रहे है।
साहित्य को समाज का दर्पण इस लिए कहा जाता है क्योकि साहित्य और लेखक ही ऐसे लोग होते है जो समाज को सही दिशा मे ले जाने के लिए अपनी कलम चलाते है। लेकिन आज, लेखक वासना और अनैतिक तथ्य जैसी चीज़ो पे अपनी कलम चला कर उसे कार्यक्रमों द्वारा प्रसरित करते है।
आज जरुरत है देश प्रेम की, आदर्शो की, युवा पीढ़ी को जागृत करने की और बच्चो को अच्छी शिक्षा देने की अगर आज लेखक देश और समाज के हित मे सोचकर लिखे तथा ऐसे कार्यक्रम बनाये जो शिक्षा और आदर्श से प्रेरित हों। इस से एक अछे राष्ट्र और समाज को बनाने मे सहयोग दे सकते है।
जय हिन्द !
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| JOY'N'SUNNY |
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Very good article
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